जाकिर खान प्रसिद्ध शायरी हिंदी में | Best Zakhir khan motivation poetry

Zakhir khan special, in this post you will read Zakhir khan motivation poetry and I hope you loved it and share with other one… Let’s read more about zakhir khan ….!!!!!

Zakhir khan  India’s most popular stand-up comedian hai. Unki journey start main achhi nahi pr baad me unhone mahnati ki aur sare struggle se apne aap ko ek brand jaise bana diya. I don’t think koi unko nhi janta ho.

Current me wo AIB k sath kam krte hai show krre hai unki kuch famous shayari i hope you wiill want to read…….!

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Zakhir khan

 जाकिर खान प्रसिद्ध शायरी / Zakhir khan motivation poetry

 

माना की तुमको इश्क़ का तजुर्बा भी कम नहीं,

हमने भी बाग़ में हैं कई तितलियाँ उड़ाई..

Mana Ki Tumko Ishq Ka Tazurba Bhi Kam Nahi,

hamne Bhi Baag Me Kahi Titaliya Udai..

Kamiyabi par shayari

 

कामयाबी हमने तेरे लिए खुद को यूँ तैयार कर लिया,

मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया..

Kamayabi humne tere liye khud ko yu taiyar kr liya,

Maine har jajbaat bajae me rakh kr ishtehar kr liya

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जिंदगी से कुछ ज्यादा नहीं,

बस इतनी से फरमाइश है,

अब तस्वीर से नहीं,

तफ्सील से मलने क ख्वाइश है..

Zidngi se kuch jada Nahi,

Bas itni si farmaish hai,

Ab tasveer se nahi,

Tafsil se milne ki khwahish hai…

शून्य पर सवार हूं।

 

बस का इंतज़ार करते हुए,

मेट्रो में खड़े खड़े

रिक्शा में बैठे हुए

गहरे शुन्य में क्या देखते रहते हो?

गुम्म सा चेहरा लिए क्या सोचते हो?

क्या खोया और क्या पाया का हिसाब नहीं लगा पाए न इस बार भी?

घर नहीं जा पाए न इस बार भी?

Bas ka intezar karte hue,

Metro me khade khade, riksha me baithe hue,

Gahare shunye me kya dekhte rahte ho?

Gumma sa chehara liye kya sochte ho?

Kya khoya aur kya paya ka hisab nahi laga pae n is bar bhi?

Bhar nhi ja pae n is bar bhi?

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तेरे मेरे बीच फर्क by zakhir khan

 

हम दोनों में बस इतना सा फर्क है,

उसके सब “लेकिन” मेरे नाम से शुरू होते है

और मेरे सारे “काश” उस पर आ कर रुकते है..

Hum dono me bas itna sa fark hai,

Uske sab lekin mere naam se shuru hote hai

Aur mere sare kash us pr aa kr rukte hai,

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उसे मैं क्या, मेरा खुमार भी मिले तो बेरहमी से तोड़ देती है,

वो ख्वाब में आती है मेरे, फिर आकर मुझे छोड़ देती है….

Use me kya, mera khumar bhi mile to beharmi se tod deti hai,

Wo khawab me aati hai mere, fir aakar mujhe chhod deti hai….!

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इश्क़ को मुश्किल न कीजिये

 

इश्क़ को मासूम रहने दो नोटबुक के आखिरी पन्ने पर,

आप उसे किताबो में डालकर मुश्किल न कीजिये..

Ishq ko mashoom rahne do notebook k aakhiree panno pr,

Aap use kitabo me dalakar mushkil n kijiye…!

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अब वो आग नहीं रही, न शोलो जैसा दहकता हूँ,

रंग भी सब के जैसा है, सबसे ही तो महेकता हूँ…

एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में,

तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ…

Ab Wo Aag Nahi Rahi, Na Sholo Jaisa Dehekta Hoon,

Rang Bhi Sab Ke Jaisa Hai, Sabsa Hi To Mehekta Hoon…

Ek Arse Se Hoon Thhame Kashti Ko Bhavar Mein,

Toofaan Se Bhi Jyada Saahil Se Darta Hoon…

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तेरे मेरे इश्क का इतिहास लिखा है 

 

हर एक कॉपी के पीछे, कुछ न कुछ खास लिखा है,

बस इस तरह तेरे मेरे इश्क का इतिहास लिखा है, तू दुनिया मैं चाहे जहाँ भी रहे,अपनी डायरी में मैंने तुझे पास लिखा है.

Har ek copy ke peeche, Kuch na Kuch Khaas likha hai,

Bas Is tarah tere mere Ishq ka itihaas likha hai,

Tu Duniya main chahe jahan bhi rahe,

Apni diary mei maine tujhe pass likha hai

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अब कोई हक़ से हाथ पकड़कर महफ़िल में दोबारा नहीं बैठाता,

सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुकसान हुआ करते है..

Ab karte hak se hath pakadkar hahfil me dobara nhi baithata…

Sitaro k bich se suraj banne ke kuch apne hi nukshan hua karte hai….

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बेवजह बेवफाओं को याद किया है

 

बेवजह बेवफाओं को याद किया है,

गलत लोगो पर बहुत बर्बाद किया है.

Bewajah bewafao ko yaad kiya hai.

Galat logo par bahut barbad kiya hai…

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तुम जितना कोई उनमे से याद नहीं आया

 

यूँ तो भूले है हमे लोग कई,

पहले भी बहुत से

पर तुम जितना कोई उनमे से याद नहीं आया..

Yu to bhule hai hum log kahi,

Pahle bhi bahut se

Pr tum jitna koi unme se yaad nhi aaya…

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ज़िन्दगी , कितने धीरे चला हूँ मैं

 

अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ में,

ज़िन्दगी , कितने धीरे चला हूँ मैं…

और मुझे जगाने जो और भी हसीं होकर आते थे,

उन् ख़्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ मैं….

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ये सब कुछ जो भूल गयी थी तुम,

या शायद जान कर छोड़ा था तुमने,

अपनी जान से भी ज्यादा,

संभाल रखा है मैंने सब,

जब आओग तो ले जाना..

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Zakhir khan motivation poetry / जाकिर खान प्रेरक कविता

 

मैं शून्य पे सवार हूँ

 

मैं शून्य पे सवार हूँ

बेअदब सा मैं खुमार हूँ

अब मुश्किलों से क्या डरूंमैं खुद कहर हज़ार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

 

उंच-नीच से परे

मजाल आँख में भरे

मैं लड़ रहा हूँ रात से

मशाल हाथ में लिए

न सूर्य मेरे साथ है

तो क्या नयी ये बात है

वो शाम होता ढल गया

वो रात से था डर गया

मैं जुगनुओं का यार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

 

Zakir khan poetry

 

भावनाएं मर चुकीं

संवेदनाएं खत्म हैं

अब दर्द से क्या डरूं

ज़िन्दगी ही ज़ख्म है

मैं बीच रह की मात हूँ

बेजान-स्याह रात हूँ

मैं काली का श्रृंगार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

 

Zakir khan poetry in hindi

 

हूँ राम का सा तेज मैं

लंकापति सा ज्ञान हूँ

किस की करूं आराधना

सब से जो मैं महान हूँ

ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ

मैं जल-प्रवाह निहार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

मैं शून्य पे सवार हूँ

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