Gulzar ki shayari in hindi | best gulzar shayari on life | gulzar quotes on life

हेलो दोस्तों आज हम gulzar ki shayari पढ़ेंगे । जिसे हमने कही बार किसी न किसी जगह जरूर हूं । ये इतनी अच्छा और खास पोस्ट आप एक बार पढ़ोगे तो आप बार बार पढ़ोगे।

इसमें दी गई शायरी सारी orignal aur Gulzar ki shayari है । हूं उम्मीद है आपको ये अच्छा लगेगा और आप इसे पढ़ कर खुश होंगे ।।

Gulzar shayari, gulzar ki shayari
Gulzar shayari in Hindi

Gulzar ki shayari

बिगड़ैल हैं ये यादे, 
देर रात को टहलने निकलती हैं।

Best Gulzar shayari 

मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं, 
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं। 
मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।
 
कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।
 
 वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, 
आदत इस की भी आदमी सी है। 
 
Gulzar shayari on life
आइना देख कर तसल्ली हुई, 
हम को इस घर में जानता है कोई। 
 
मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।
 
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका।

Gulzar shayari in hindi

 
कभी तो चौक के देखे कोई हमारी तरफ़, 
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।
 
दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा, 
इसका शायद कोई हल नहीं हैं।
 
हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे?
 
वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, 
हम भूल गए हैं रख के कहीं।

Gulzar famous shayari “तन्हा” shayari

 

 ज़िंदगी यूँ हुयी बसर तन्हा,

काफिला साथ और सफर तन्हा

अपने साये से चौंक जाते हैं,

उम्र गुजरी है इस कदर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे,

रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगो में,

रात होती नहीं बसर तन्हा

Read more :-

Zakhir khan famous shayari

Kanha kamboj famous shayari

 

Gulzar ki kavita : tanha

हमने दरवाज़े तक तो देखा था,

फ़िर न जाने गए किधर तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा

दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा

बुझ गई आस छुप गया तारा

थरथराता रहा धुआँ तन्हा

ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं

जिस्म तन्हा है और जाँ तन्हा

हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी

दोनों चलते रहें कहाँ तन्हा

जलती-बुझती-सी रोशनी के परे

सिमटा-सिमटा-सा एक मकाँ तन्हा

राह देखा करेगा सदियों तक

छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा

 

“Talaash” gulzar ki kavita 

 

मेरे बदन से आती है आपकी खुश्बू

आप यूँ मेरे आगोश में ना आया कीजे

मैं साँस लूँ तो लगे ये हैं आपकी साँसे

मेरी साँसो में सनम यूं ना समाया कीजे

दिल की धड़कनो पर मेरा इख़्तियार नहीं

दिल की धड़कनो को यूँ ना बढ़ाया कीजे

क्यों रोज आप जाने की बात करती हैं

हर रात हमको सनम यूं ना सताया कीजे

सारी उम्र आप ही को तो चाहा है ‘जय’

पल दो पल के लिए सनम बन जाया कीजे

हमे उम्मीद है आपको हमारी पोस्ट gulzar ki shayari पसंद आई होगी । अगर आपके भी कोई दोस्त या मेंबर जिसको इसी शायरी  पढ़ना का शौक रखते है उन्हे ये जरूर सेंड करे जिससे उन्हें भी इसी शायरी पढ़ने का मौका मिले ।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.