Tehzeeb Hafi Shayari 2023 | तहज़ीब हाफी की best शायरी

उनकी हर एक शायरी नेचर से  जुडी है और  वो भी नेचर  को बहुत वैल्यू करता है  इनका लेखन कार्य बहुत ही अलग है । अगर आप पहली बार आए है तो पढ़ कर जरूर जाए ।

Tehzeeb Hafi 

Tehzeeb hafi , all tehzeeb hafi shayari in hindi
शायरियों की बात हो तो तहजीब  ( Tehzeeb hafi  )का ज़रुर  आता है 
तहजीब हाफी ( Tehzeeb hafi  ) एक काफी समय से चर्चा में रहे एक बहुत ही उम्दा कवि है। उनकी शायरी को मेने सबसे पहले status पे देखा था। तब मैं स्वयं उनके शायरी और पोएट्री का fan हो गया हूं।
स्रोत के अनुसार इतना जान पाया हूं के वो पाकिस्तान से है। और अपनी शायरी को लाहौर के मंच से ही पढ़ते है ।
 
आपने अगर इनके बारे जानने की कोशिश की होगी तो आपको ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई होगी। उसके जीवनी के बारे कुछ भी गूगल पे fact से नही डाल रखा है। 

तहज़ीब हाफी सबसे प्रसिद्ध  शायर / Tehzeeb Hafi Shayari

 
तहजीब हाफी एक पर्यावरण कवि है। अगर आप उनकी शायरी पे गौर करोगे तो आपको पता चलेगा के उनकी जादतर शायरी में पेड़ पौधों नदी, रेत जंगल और पर्यावरण से संबंधित ही मिलेगा।
 
इसलिए हमने विचार किया कि इनकी शायरी हमारे पेज के माध्यम से आप लोगो तक पोच पाए । हमने इनकी शायरी के सारे collection को एक ही जगह पर रखा है। ताकि आपको कही और जाके ढूंढना न पड़े । 
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( Read more : - Guljar shayari in hindi )
 


Tehzeeb Hafi Shayari 

 तहज़ीब हाफ़ी rekhta 

 

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में

क्या बैठ गया ” तहज़ीब हाफी

 

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

इतनी आवाजें  तुझे दीं  कि गला बैठ गया

यूं नहीं है की फकत में ही उसे चाहता हूँ

जो भी उस पेड़ की छाव में गया बैठ गया

Tahzeeb hafi ki shayari in hindi  

 

इतना मीठा  वो गुस्से भरा लहज़ा मत पूछ

उस ने जिस जिस को भी जाने का कहा बैठ गया

अपना लड़ना भी मोहबत है  तुम्हे  इलम  नहीं

चीखती तुम रही  और मेरा गला बैठ गया

उस की मर्जी वो जिसे पास बैठा ले अपने

इस पे क्या लड़ना फलां  मेरी जगह बैठ गया

बात  दरियाओ की सूरज की न तेरी है यहाँ

दो कदम जो भी मेरे साथ चला बैठ गया

Tehzeeb hafi shayari in hind

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तू  तीर है तो मेरे कलेजे के पर हो  "तहज़ीब हाफी "

जो तेरे साथ रहते हुए  सोगवार हो,

लानत हो ऐसे शख्स पे और बेशुमार हो |

और अब इतनी देर भी न लगा , ये हो न कही

तू आ चूका हो और तेरा इंतेज़ार हो

Ishq par tahzeeb hafi shayari

 

मैं फूल हूँ तो तेरे बालो में क्यों नहीं  हूँ

तू तीर है तो मेरे कलेजे के पर हो

एक  आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर

हाफी  तुम आदमी तो बहुत शानदार हो

तू हमें चूमता था “तहज़ीब हाफी”

Tahzeeb hafi shayari in hindi

 

जहन पर जोर देने से भी याद नहीं आता की हम क्या देखते थे

सिर्फ इतना पता है की हम आम लोगो से बिलकुल जुड़ा देखते थे

तब हमे अपने पुरखो से विरसे में आई हुई बदुआ याद आयी

जब कभी अपनी आँखों  के आगे तुझे  शहर जाता हुआ देखते थे

Tahzeeb hafi all shayari in hindi 

 

सच  बताए तो तेरी मोहबबत ने खुद पर तवज्जों  दिलाई हमारी

तु  हमे चूमता था तो घर  जाकर हम  आइना  देखते थे

 सारा दिन रेत  के घर बनते हुए और गिरते हुए बीत जाता

शाम होते ही हम दूरबीनो में अपनी छतो से खुदा देखते थे

उस लड़ाई में दोनों तरफ कुछ सिपाही   थे जो नींद में बोलते थे

जंग टलती नहीं थी सिरों से मगर ख्वाब में फखत देखते थे

दोस्त किसको पता है की वक़्त उसकी आँखों से फिर किस तरह पेश आया

हम इकठा थे हस्ते थे एक दूसरे को बड़ा देखते थे |

 

वो जुल्फ सिर्फ मेरे हाथ से सवरनी  है “तहज़ीब हाफी”

 

Tahzeeb hafi shayari 

 

न   नींद और न ख्वाबो से आंख भरनी है

की उस से हम ने तुझे देखने की करनी है

किसी दरख़्त  की हिद्त  में दिन गुजरना है

किसी चिराग की छाव में रात करनी है

वो  फूल और किसी शाख पर नहीं  खिलता

वो जुल्फ सिर्फ मेरे हाथ से सवरनी  है

तमाम नाखुदा  साहिल से दूर हो जाए

समुन्द्रो से अकेले में बात करनी है

हमारे गांव का हर फूल मरने वाला है

अब उस गली से वो खुशबू नहीं गुजरती है

दिया जले -“तहज़ीब हाफी”

Diya jale- tahzeeb hafi shayari

 
 

तारीकियों को आग लेंगे और दिया जले

ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उसकी जबान में इतने असर है की निशब्द

वो रोशनी की बात करे और दिया जले

तुम चाहते  हो की तुमसे बिछड़ के खुश रहूँ

यानि हवा भी चलती रहे  दिया जले

क्या मुझको भी अजीज है तुमको  लौ

फिर तो मेरा मजार बने  दीया  जले

सूरज तो मेरी आंख से आगे की चीज़ है

मै चाहता हु शाम ढले और दीया जले  |

अगर  कभी तेरे नाम पर जंग हो गयी तो “तहज़ीब हाफी”

 

जंग  ho gayi – tahzeeb hafi shayari

 

उसी जगह  पर जहा कई रस्ते मिलेंगे

पलट के आए तो सबसे पहले तुझे मिलेंग

अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गयी तो

हम ऐसे बुजदिल भी पहले साफ में खड़े मिलेंगे

तुझे ये सड़के मेरे तवस्सुत  से जानती है

तुझे हमेशा  ये सब इशारे खुले मिलेंगे

ये किस तरह का ताल्लुक है “तहज़ीब हाफी”

ये किस तरह का ताल्लुक है  आपका मेरे साथ

मुझे ही छोड़ जाने का मश्वरा मेरे साथ

यही  कही हमें रास्तो ने बदुआ दी थी

मगर में भूल  गया और कौन था  मेरे साथ

वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है

तुझे यकीन नहीं रहा  तो आ मेरे साथ

कुछ और  शायरी  तहज़ीब  हाफि

 

यार ये कैसा महबूब है – Tehzeeb Hafi Shayari

 

घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा

जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा।

रात के तीन बजने को हैं, यार ये कैसा महबूब है?

जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा।

उसके घर का पता जानते हो – तहज़ीब हाफी 

 

Viral  शायरी तहज़ीब हाफि ( tehzeeb hafi shayari )

 

गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ

नये मकान में खिड़की नहीं बनाऊंगा।

फरेब दे कर तेरा जिस्म जीत लूँ लेकिन

मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊंगा।

Tehzeeb hafi sher in hindi 

 

अपना ”लड़ना’ भी मोहोब्बत है तुम्हे__इल्म नहीं,

चीखती तुम रही और मेरा #गला बैठ गया।

 

“Sab thik hai” तहजीब हाफी शेरो शायरी इन हिंदी

 

साख से पत्ता #गिरे, बारिश रुके, _बादल छटे,

मै ही तो सब_गलत करता हूँ ‘अच्छा’ ठीक है

तहजीब hafi शायरी इन hindi

 

उस_लड़की से बस इतना रिश्ता है,

मिल जाए तो बात #वगैरह करती है,

Tehzeeb hafi shayari

Tahzeeb hafi shayari in hindi

 

हम एक उम्र इसी गम में मुब्तला रहे थे

वो #सान्हे ही नहीं थे जो पेश आ रहे थे।

Tehzeeb hafi shayari

तहजीब hafi shayari

 

सच बताएं तो तेरी मोहब्बत ने खुद पर तवज्जो दिलाई हमारी,

तू हमें चूमता था तो घर जाकर हम देर तक आईना देखते थे

 

Diwana bana dete – hafi shayari

 

तुझे भी अपने साथ रखता और उसे भी अपना दीवाना बना लेता,

अगर मैं चाहता तो दिल में कोई चोर दरवाज़ा बना लेता।

मैं अपने ख्वाब पूरे कर के खुश हूँ पर ये पछतावा नहीं जाता,

के मुस्तक़बिल बनाने से तो अच्छा था तुझे अपना बना लेता..।

 

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